चंद्र मास के दो ध्रुव
चंद्र मास दो ध्रुवों के बीच दोलन करता है: अमावस्या (அமாவாசை), जब चंद्रमा अदृश्य होता है, और पूर्णिमा (பௌர்ணமி), जब चंद्रमा पूर्ण प्रकाशित होता है। खगोलीय दृष्टि से, अमावस्या वह क्षण है जब चंद्रमा और सूर्य की क्रांतिवृत्त देशांतर लगभग समान होती है (दीर्घवृत्त ≈ 0°), और पूर्णिमा वह क्षण जब वे एक-दूसरे के सामने होते हैं (दीर्घवृत्त ≈ 180°)। पंचांग में, अमावस्या कृष्ण पक्ष की 30वीं (अंतिम) तिथि है और पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की 15वीं (अंतिम) तिथि।
दोनों दिनों का गहरा अनुष्ठानिक महत्त्व है। अमावस्या 'पितरों का दिन' है, पितृ अनुष्ठान का दिन। पूर्णिमा 'मंदिरों का दिन' है, पूजा और चंद्रदीप का दिन। मिलकर ये चंद्र मास की श्वास और प्रश्वास हैं।
अमावस्या, नए चाँद का दिन
तर्पण: पितरों के लिए अनुष्ठान
अमावस्या वह नियमित दिन है जब हिंदू परिवार तर्पण (தர்ப்பணம்) करते हैं, एक जल अनुष्ठान जिसमें मृत पूर्वजों को जल, तिल और चावल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि अमावस्या पर पितरों की आत्माएं पृथ्वी के निकट होती हैं और तर्पण उनकी यात्रा को सुगम बनाता है।
- तर्पण सामान्यतः सूर्योदय या प्रातःकाल, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके किया जाता है (पितरों की दिशा)।
- परंपरागत रूप से परिवार के पुरुष जिम्मेदार होते हैं, किंतु आधुनिक व्यवहार में सभी वयस्क करते हैं।
- काले तिल (एल्लु) और चावल मिश्रित जल तीन पीढ़ियों के पितरों के लिए विशेष मंत्रों के साथ अर्पित किया जाता है।
- थाई अमावस्या (जनवरी–फरवरी) वर्ष का सबसे महत्त्वपूर्ण तर्पण दिवस है। हजारों रामेश्वरम जाते हैं।
- आडि अमावस्या (जुलाई–अगस्त) दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण है, नदियों और समुद्र तट पर बड़े जमावड़े होते हैं।
- महालय अमावस्या (पुरट्टासी मास, सितंबर–अक्टूबर) 15 दिवसीय पितृ पक्ष की समाप्ति है।
अमावस्या, 'अशुभ' दिन की अवधारणा
अमावस्या परंपरागत रूप से नए कार्यारंभ के लिए अशुभ मानी जाती है, नई परियोजनाएं, अनुबंध या विवाह से बचा जाता है। तर्क यह है कि चंद्रमा की पूर्ण अनुपस्थिति (अंधकार) रिक्तता और समापन का प्रतीक है। किंतु अमावस्या बुरी नहीं, यह आत्मचिंतन, समापन और पूर्वजों के सम्मान का दिन है।
पूर्णिमा, पूर्ण चंद्रमा का दिन
मंदिर दर्शन और पूर्णिमा अनुष्ठान
पूर्णिमा मंदिर दर्शन के लिए सबसे शुभ दिन है। कई मंदिरों में विशेष पूजाएं होती हैं, भक्त पूर्णिमा दीप (विलक्कु) जलाते हैं और प्रदक्षिणा (मंदिर की परिक्रमा) करते हैं। सत्यनारायण पूजा, समृद्धि से जुड़ी विष्णु पूजा, पारंपरिक रूप से पूर्णिमा को की जाती है।
- चित्तिरई पूर्णिमा (अप्रैल–मई): पहले तमिल मास की पूर्णिमा। उत्सवी मंदिर दिवस।
- वैकासी विशाखम (मई–जून): जब पूर्णिमा विशाखा नक्षत्र के साथ पड़े, मुरुगन का जन्मदिन।
- आवणि अवित्तम (अगस्त): ब्राह्मण पवित्र यज्ञोपवीत नवीनीकरण, पूर्णिमा के निकट।
- थाई पूसम (जनवरी–फरवरी): पूर्णिमा + पुष्य नक्षत्र, प्रमुख तमिल मंदिर उत्सव।
- गुरु पूर्णिमा (आषाढ़ मास): गुरु के प्रति श्रद्धांजलि।
- कार्तिगई दीपम (नवंबर–दिसंबर): कार्तिगई मास की पूर्णिमा, संपूर्ण तमिलनाडु में दीप उत्सव।
पूर्णिमा और व्रत
पूर्णिमा व्रत ऐच्छिक है, यह एकादशी जैसा अनिवार्य व्रत नहीं है। किंतु अनेक लोग पूर्णिमा पर फल और दूध का हल्का व्रत रखते हैं और दिन को ध्यान तथा मंदिर दर्शन में बिताते हैं। शिव भक्त पूर्णिमा को विशेष पवित्र मानते हैं, क्योंकि शिव अपने बालों में चंद्रमा धारण करते हैं।
प्रमुख अमावस्या और पूर्णिमा दिवस
| दिन | मास | प्रकार | महत्त्व |
|---|---|---|---|
| थाई अमावस्या | थाई (जन.–फर.) | अमावस्या | सबसे महत्त्वपूर्ण तर्पण दिवस। रामेश्वरम तीर्थयात्रा। |
| आडि अमावस्या | आडि (जुलाई–अगस्त) | अमावस्या | दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तर्पण। नदियों और तटों पर जमावड़ा। |
| महालय अमावस्या | पुरट्टासी (सित.–अक्त.) | अमावस्या | पितृ पक्ष, 15 दिवसीय पितृ काल की समाप्ति। |
| चित्तिरई पूर्णिमा | चित्तिरई (अप्रैल–मई) | पूर्णिमा | तमिल नव वर्ष मास की पूर्णिमा। उत्सवी मंदिर दिवस। |
| वैकासी विशाखम | वैकासी (मई–जून) | पूर्णिमा | मुरुगन जन्मदिन, पूर्णिमा + विशाखा नक्षत्र। |
| थाई पूसम | थाई (जन.–फर.) | पूर्णिमा | प्रमुख मंदिर उत्सव। पूर्णिमा + पुष्य नक्षत्र। |
| कार्तिगई दीपम | कार्तिगई (नव.–दिस.) | पूर्णिमा | संपूर्ण तमिलनाडु में दीप उत्सव। |
| गुरु पूर्णिमा | आषाढ़ (जुलाई–अगस्त) | पूर्णिमा | गुरु को श्रद्धांजलि। |
नए चाँद और पूर्णिमा के पीछे की खगोल-विज्ञान
पंचांग में, अमावस्या और पूर्णिमा चंद्र-सूर्य दीर्घवृत्त द्वारा निर्धारित होती हैं, पृथ्वी से देखे जाने पर चंद्रमा और सूर्य की क्रांतिवृत्त देशांतर का कोणीय अंतर।
| दिन | तिथि | दीर्घवृत्त | क्या होता है |
|---|---|---|---|
| अमावस्या | 30 (कृष्ण पक्ष की अंतिम) | 348°–360° (≈ 0°) | चंद्रमा और सूर्य लगभग एक ही देशांतर पर। चंद्रमा अदृश्य (संयोग)। |
| पूर्णिमा | 15 (शुक्ल पक्ष की अंतिम) | 168°–180° | चंद्रमा और सूर्य एक-दूसरे के सामने। चंद्रमा पूर्ण (प्रतियोग)। |
प्रत्येक तिथि 12° दीर्घवृत्त को कवर करती है। अमावस्या (तिथि 30) = 348°–360°, पूर्णिमा (तिथि 15) = 168°–180°। पंचांग में सूर्योदय की तिथि को गिना जाता है।
अमावस्या/पूर्णिमा और आपका नगर
सभी तिथि-आधारित पर्वों की तरह, अमावस्या और पूर्णिमा विभिन्न नगरों में अलग-अलग तिथियों पर पड़ सकती हैं। कारण वही है: सूर्योदय पर तिथि दिन निर्धारित करती है, और सूर्योदय नगर के अक्षांश, देशांतर और समय क्षेत्र के अनुसार बदलता है।
கணக்கு எடுத்துக்காட்டு
उदाहरण: चेन्नई बनाम न्यूयॉर्क में पूर्णिमा
मान लें तिथि 15 (पूर्णिमा) 03:00 UTC पर शुरू होती है और तिथि 16 22:00 UTC पर।
- चेन्नई सूर्योदय
- 05:58 IST (00:28 UTC)
- न्यूयॉर्क सूर्योदय
- 06:10 EDT (10:10 UTC)
- दोनों नगर
- एक ही तिथि
- यदि तिथि 15 छोटी हो (05:00–08:00 UTC)
- चेन्नई 00:28 < 05:00 → तिथि 14। न्यूयॉर्क 10:10 > 08:00 → तिथि 16। कोई नगर पूर्णिमा नहीं देखता!
तिथि 15 सूर्योदय पर → आज पूर्णिमा
तिथि 15 (03:00 < 10:10 < 22:00) → आज पूर्णिमा
क्योंकि तिथि 15 पूरे दिन रहती है (03:00–22:00 UTC)
क्षय तिथि: पूर्णिमा है पर किसी सूर्योदय पर नहीं रहती
सामान्यतः सभी नगर पूर्णिमा एक ही या निकटवर्ती दिन देखते हैं। क्षय पूर्णिमा अत्यंत दुर्लभ है क्योंकि तिथि 15 सामान्यतः 24 घंटे से अधिक रहती है।
अमावस्या और पूर्णिमा दैनिक जीवन में
- कई तमिल परिवार अमावस्या को महत्त्वपूर्ण निर्णयों से मुक्त रखते हैं, यह मौन, तर्पण और स्मरण का दिन है।
- पूर्णिमा मंदिर दर्शन, दान (अन्नदानम) और सकारात्मक आदतें शुरू करने का पसंदीदा दिन है।
- सतभिषेकम (80वाँ जन्मदिन समारोह) और कुछ पूजाएं पूर्णिमा के लिए निर्धारित होती हैं।
- अमावस्या तेल: कई तमिल लोग अमावस्या की सुबह स्नान से पहले शरीर पर तिल का तेल (नल्ल एण्णई) लगाते हैं।
- मछुआरे और किसान अभी भी अमावस्या/पूर्णिमा का उपयोग योजना बनाने में करते हैं: पूर्णिमा पर उच्च ज्वार, अमावस्या पर बेहतर मछली पकड़।