हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, भगवान गणेश की पूजा और विघ्न निवारण के लिए व्रत दिवस।
संकटहर चतुर्थी कृष्ण पक्ष की 4वीं तिथि पर मनाया जाने वाला मासिक गणेश व्रत है। नाम का अर्थ है 'कठिनाइयों को दूर करने वाला' — संकट (कठिनाई) और हर (नाशक) — यह दिन विघ्नहर्ता गजमुखी देवता की पूजा को समर्पित है।
व्रत सूर्योदय से रात्रि के चंद्रोदय तक रखा जाता है; चंद्रमा दर्शन के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है। कोझुक्कट्टई और मोदक, गणेश जी की प्रिय मिठाइयाँ, बनाकर अर्पित की जाती हैं।
तमिल माह आवणी (अगस्त-सितंबर) की संकटहर चतुर्थी सबसे शक्तिशाली मानी जाती है, क्योंकि यह वार्षिक विनायकर चतुर्थी के निकट आती है। जो प्रतिमाह इसे मनाते हैं, उनके जीवन की सभी बाधाएँ धीरे-धीरे दूर होती मानी जाती हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संकटहर चतुर्थी क्या है?
संकटहर चतुर्थी प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, भगवान गणेश को समर्पित उपवास का दिन। 'संकट' अर्थात बाधा, 'हर' अर्थात हटाने वाला। इस दिन की प्रार्थना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
साल में कितनी संकटहर चतुर्थी होती है?
साल में 12 संकटहर चतुर्थी होती हैं, प्रति चंद्र मास एक। सभी तिथियाँ इस पृष्ठ पर सूचीबद्ध हैं।
