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प्रदोष

பிரதோஷம்

प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी, संध्या में भगवान शिव की आराधना का पवित्र दिन, महीने में दो बार।

प्रदोषम् प्रत्येक चंद्र पक्ष की त्रयोदशी (13वीं) तिथि को आता है, महीने में दो बार। पवित्र समय सूर्यास्त से 1½ घंटे पहले और बाद का होता है, जब भगवान शिव भक्तों पर सबसे अधिक कृपालु माने जाते हैं।

जब प्रदोषम् शनिवार को पड़ता है तो इसे शनि प्रदोषम् कहते हैं — सबसे शुभ प्रदोषम्, जो वर्ष में केवल 3–4 बार आता है। सोमवार (सोम प्रदोषम्) और मंगलवार (भौम प्रदोषम्) भी विशेष माने जाते हैं।

भक्त सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं, फिर शिव मंदिर में नंदी और शिव के पंचमुख रूप की पूजा करते हैं। प्रदोषम् काल में की गई प्रार्थना कर्म बाधाओं को दूर करने में विशेष शक्तिशाली मानी जाती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रदोषम् क्या है?

प्रदोषम् प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, महीने में दो बार आती है। यह भगवान शिव की संध्याकालीन पूजा का पवित्र समय है।

एक वर्ष में कितने प्रदोषम् होते हैं?

एक वर्ष में लगभग 24 प्रदोषम् होते हैं, प्रति चंद्र मास दो। सभी तिथियां इस पृष्ठ पर सूचीबद्ध हैं।

शनि प्रदोषम् क्या है?

जब प्रदोषम् शनिवार को आता है, तो उसे शनि प्रदोषम् कहते हैं और इसे सबसे शुभ माना जाता है। यह वर्ष में 3–4 बार होता है।

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