கார்த்திகை தீபம்
कार्तिगै नक्षत्र पर दीपों का उत्सव; प्रकाश और मंगल के लिए पंक्तियों में तेल के दीप जलाए जाते हैं।
कार्तिगै दीपम एक प्राचीन तमिल दीप-पर्व है, जो कार्तिगै महीने (नवंबर–दिसंबर) में पूर्णिमा और कार्तिगै नक्षत्र के मिलन पर मनाया जाता है। घरों और मंदिरों को तेल के दीयों की कतारों से सजाया जाता है।
तिरुवण्णामलै के अरुणाचलेश्वर मंदिर में पहाड़ी की चोटी पर एक विशाल दीप जलाया जाता है, जो कई मील दूर से दिखाई देता है — शिव के अनंत प्रकाश का प्रतीक। घरों में माना जाता है कि ये दीप अंधकार को दूर करते हैं और समृद्धि को आमंत्रित करते हैं।
आगामी त्योहार
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्तिगै दीपम क्या है?
कार्तिगै दीपम एक प्राचीन तमिल दीप-पर्व है। घरों और मंदिरों को छोटे तेल के दीयों की कतारों से सजाया जाता है। यह प्रकाश के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है।
कार्तिगै दीपम कब है?
यह तमिल महीने कार्तिगै में, नवंबर या दिसंबर में पड़ता है। यह वह दिन है जब पूर्णिमा कार्तिगै नक्षत्र से मिलती है।
कार्तिगै दीपम क्यों मनाया जाता है?
दीये शिव के प्रकाश के प्रतीक हैं। इन्हें अंधकार को दूर रखने और अच्छाई को आमंत्रित करने के लिए जलाया जाता है। यह एक शांत, प्रकाशमय संध्या है।
कार्तिगै दीपम कैसे मनाया जाता है?
लोग घर और मंदिर में मिट्टी के दीयों की कतारें जलाते हैं। तिरुवण्णामलै में पहाड़ी पर एक विशाल दीप जलाया जाता है। यह कई मील दूर से दिखाई देता है।