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तैपूसम

தைப்பூசம்

भगवान मुरुगन का उत्सव; भक्त मन्नत पूरी करने के लिए कावड़ी उठाते हैं।

तैपूसम तमिलों के विजय के देवता भगवान मुरुगन का पर्व है, जो तै महीने (जनवरी–फरवरी) में पूसम नक्षत्र और पूर्णिमा के मिलन पर पड़ता है। यह उस 'वेल', दिव्य भाले, की याद दिलाता है, जो उनकी माता पार्वती ने बुराई का नाश करने के लिए उन्हें दिया था।

भक्त कई सप्ताह के उपवास के बाद, सजा हुआ 'कावडि' उठाकर, भक्ति की तल्लीनता में मंदिर तक चलकर अपनी मन्नत पूरी करते हैं। इसे मलेशिया, सिंगापुर और प्रवासी तमिल समुदायों में सबसे भव्य रूप में मनाया जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तैपूसम क्या है?

तैपूसम भगवान मुरुगन का पर्व है। वे तमिलों के युद्ध और विजय के देवता हैं। इस दिन भक्त अपनी मन्नतें पूरी करते हैं।

तैपूसम कब है?

यह तमिल महीने तै में, जनवरी या फरवरी में पड़ता है। यह वह दिन है जब पूसम नक्षत्र पूर्णिमा से मिलता है।

तैपूसम क्यों मनाया जाता है?

यह दिन उस 'वेल', भाले, की याद दिलाता है, जो उनकी माता पार्वती ने बुराई को हराने के लिए उन्हें दिया था। लोग मुरुगन का आभार जताते हैं और अपने वचन निभाते हैं।

तैपूसम कैसे मनाया जाता है?

कई लोग पहले कई सप्ताह उपवास रखते हैं। फिर वे 'कावडि', एक सजा हुआ मेहराब, मंदिर तक ले जाते हैं। यह मलेशिया, सिंगापुर और प्रवासी समुदायों में बहुत बड़े रूप में मनाया जाता है।